लालच
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लालच
कविता
तू सावन की खूबसूरत बहार बन जाए मैं रिमझिम बरसात सी बरसती रहूं... तू उमड़-घूमड़ता आवारा बादल बन जाए, मैं बिजली की तरह चमकती रहूं
: rani
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