एक तरफा प्यार
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एक तरफा प्यार
कविता
कर के एक तरफा प्यार, मैं तो गया हार। तेरी मीठी मीठी बातों में, तुझसे होने वाली मुलाकातों में। मैं तो उलझा ऐसा, रही ना खुद की होश ना खबर। गया अपना दिल हार। मेरी बातों पर वो, हंसती थी इतराती थी।
: निर्मेश
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