कर्म
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कर्म
कविता
संसार माया मोह का पहने कवच ऐसा खड़ा, है वेधना सम्भव नहीं कितना कठिन यह वर्म हैll परवाह करता कौन है कोई दुखी हो या मरे, समझा कोई सकता नहीं दुनियाँ बड़ी बेशर्म हैll
: Writer Dev
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