कर्तव्य
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कर्तव्य
कविता
कर्तव्य निभाने की खातिर, सदा तैयार हैं बेटियां। चाहे हो बेटी चाहे हो बहन, करती हैं सदैव ये अपना फर्ज वहन। बाप की मर्यादा की खातिर, कर देती हैं सदा अपनी खुशी कुर्बान।
: निर्मेश
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