कर्त्तव्य
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कर्त्तव्य
कविता
भूक प्यास सब भूल चुका, इन कपड़ों में दम घुटता है, ये सफेद वर्दी क्या मिली, अब मन दुसरों के लिए जीता है।
: rani
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