सरहद
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सरहद
कविता
किसी सहरा' में बिछड़ जाएंगे सब यार मेरे, किसी जंगल में भटक जाएगा लश्कर मेरा। बावफ़ा था तो मुझे पूछने वाले भी न थे, बेवफ़ा हूं तो हुआ नाम भी घर-घर मेरा।
लेखक : Rahul
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