जुदाई
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जुदाई
कविता
मेरी जुदाई से तड़प कर, कभी नम होती है..? क्या जुदाई उसको भी, मेरी तरह बेचैन करती है..? जुदाई का दर्द सिर्फ वही समझता है, जो अपने से जुदा जो होता है।
: निर्मेश
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