श्मशान का सत्य

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श्मशान का सत्य


यार…. मैं अकेला श्मशान घाट में खड़ा हूं। कोई मेरी मदद को नहीं है। पूरे दिन के बाद अभी बारी आई है तेरी भाभी के अंतिम संस्कार की। कुछ समझ नहीं आ रहा मैं क्या क्या करूं .. कैसे कैसे करूं।” अब मुझसे नहीं रुक गया। मैने मास्क लगाया सेनेटाइजर लिया और अपनी गाड़ी ले कर श्मशान घाट जाने लगा। मेरी बहन मुझे रोकते हुए बोली, “भईया..! शाम हो रही है। जब तक आप श्मशान घाट पहुंचोगे अंधेरा हो जाएगा। और आप तो इतना डरते हो। कैसे जाओगे…?”

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