कसूर
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कसूर
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
"कुछ कहानियां मुकम्मल होकर भी अधूरी रह जाती हैं, क्योंकि मोहब्बत का कसूर कभी वक्त तो कभी तकदीर से बड़ा होता है।"
: Samridhi
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