कसूर
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कसूर
कविता
तेरा कसूर है ना मेरा कसूर है! लव जिहाद का तो बस यही दस्तूर है! इस दलदल से निकलना आसान नहीं है! किसी के लिए लाल सूटकेस, तो किसी के लिए तंदूर ! --विचारक्रांति
लेखक : Poet Baba Vk
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