कसूर
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कसूर
कविता
कविता
आंसुओं को पीना पुरानी आदत है मुझे आंसू बहाना नहीं आता, लोग कहते हैं मेरा दिल है पत्थर का इसलिए इसको पिघलना नहीं आता
: Writer Dev
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