कसूर
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कसूर
कविता
दिल में तेरी गूंजती आवाज़, थमने जर्जा लगी है, मेरी दुनिया भी अब डूबने सी लगी है... चली जाओ दूर, कितना दूर तुम जाओगी, पूरे जहा को परख के, वापिस मेरे पास ही तो आओगी....
लेखक : Rahul
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