आप आध्यात्मिकता के बारे में तभी सोचते हैं, जब मौत से आपका सामना होता है। जब आपको इस बात का पता चलता है और अहसास होता है कि आप नश्वर हैं, आप मर सकते हैं, कल सुबह भी आप मर सकते हैं तब आप जानना चाहते हैं कि आखिर ये सब क्या चीज है? तब आप जानना चाहते हैं कि ‘मैं जो हूं’ उसकी असली प्रकृति क्या है? आप जानना चाहते हैं कि आप कहां से आए हैं और आप कहां जाएंगे? इस सोच के साथ ही आध्यात्मिक प्रक्रिया शुरू हो जाती है।