कसूर
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कसूर
कविता
मेरा कसूर क्या था..? बार बार बारम्बार सोचती हूं। क्या मेरी कसूर ये था कि जब कोई कटघरे में है खड़ा करता, मैं खामोश रहती हूं, जब कोई लगाता है, इल्ज़ाम मुझ पर बिना किसी कसूर के।
: निर्मेश
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