" के चमत्कार"

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" के चमत्कार"


 विज्ञान के कुछ चमत्कार अद्वितीय अविश्वसनीय तथा अद्भुत प्रकार के होते हैं! जी, क्षमा कीजिएगा त्रुटि के लिए हमें खेद है. चमत्कार नहीं विज्ञान के कुछ बहुमूल्य आविष्कार ऐसे होते हैं जिनके उपयोग से जीवन में आमूलचूल परिवर्तन आ जाते हैं! जीवन की परिभाषाएं बदल जाया करती है! तथा जीवन के नैतिक मूल्य बदल जाया करते हैं! जी हम बात कर रहे हैं कान में लगाई जाने वाली उस मशीन की जिसने देशभर में हंगामा मचा रखा है. सुना है कि उस मशीन में कुछ विशेष प्रकार की सेटिंग डालने के बाद कान में लगाते ही तो महिलाओं को अपने पति के मन मस्तिष्क में चलने वाली सारी बातें सुनाई देने लग जाती है. एक हिसाब से देखा जाए तो सोशल वर्किंग क्षेत्र में कान में लगाई जाने वाली इस मशीन को मील का एक पत्थर कहा जा सकता है. क्योंकि इससे पति के चरित्र को सुधारने में पत्नियों को दुर्लभ कामयाबी प्राप्त हो सकती है. उड़ते उड़ते यह खबर हमारे कानों तक भी पहुंची किंतु सच कहा जाए तो हमें इस बात पर यकीन नहीं हुआ. और यकीन होना भी नहीं चाहिए! यह क्या बात हुई कि कोई कान में मशीन लगाकर पति के मन में चल रही बातों को सुन सकता है. हां एक बार देवी देवताओं के बारे में कहा जाए कि वे मनुष्य के मन की बातें सुन लेते हैं तो यह बात ठीक है. ईश्वर हमारे मन की समग्र बातें समझ लेता है यह बात भी सच मानी जा सकती है. किंतु वैज्ञानिकों द्वारा बनाई गई कोई मशीन मनुष्य के मन की बातें दूसरे मनुष्य को सुना दे इसकी कार्यक्षमता पर हमें भरोसा नहीं आया. और वह भी विशेषकर सिर्फ पतियों के मन की बातें पत्नी को सुनाई देती है. किसी ओर के मन की बातें उन्हें सुनाई नहीं देती है. हो सकता है गैजेट में आई प्रिंट डालकर सेटिंग डाली जाती हो सिर्फ उसी के मन की बातें कान में लगाने वाली स्त्री को सुनाई देती हो ऐसा हो सकता है. और फिर विज्ञान का युग है. इस युग में कुछ भी हो सकता है. यह बात अलग है कि कमजोर बुद्धि के धनियों के लिए विज्ञान के चरमोत्कर्ष को समझ पाना संभव नहीं है. और फिर हमारे जैसे कुड़ मगज को ऐसे झंझट में पड़ने की जरूरत भी क्या है? हम तो सादा जीवन उच्च विचारों वाले संत प्रवृत्ति के व्यक्ति हैं. श्रीमती जी के साथ हम ससुराल जा रहे थे. हमारे साले साहब के लड़के की शादी का आशीर्वाद समारोह अटेंड करने के लिए. रेलगाड़ी अपनी रफ्तार से दौड़ी चली जा रही थी. दो बच्चों के साथ हम श्रीमती जी की बगल में बैठे हुए थे. सामने वाली ऊपर की सीट पर कोई महिला यात्री सोई हुई थी मेहंदी महावर रचे हुए उसके सिर्फ गुलाबी पैर ही दिखाई पड़ रहे थे. अचानक हमारी दृष्टि उसके पैरों पर पड़ी और हमें अपने जमाने की सुपर डुपर फिल्म पाकीजा का वह सीन याद आ गया जिसमें अभिनेत्री मीना कुमारी के खूबसूरत पैरों को देखकर फिल्म के नायक राजकुमार का दिल घायल होकर बिन पानी की मछली की तरह तड़प उठा था. ऊपर की बर्थ पर सोई हुई महिला के पैरों को देखकर हमारे मन मस्तिष्क में ऐसी उथल पुथल ही नहीं मची बल्कि हमारी अतृप्त आत्मा के भीतर जैसे ज्वालामुखी फूट पड़ा!  दिल ने आहें भरते हुए सिसकारी लेकर कहा- -'माशा अल्लाह क्या खूबसूरत पैर हैं! जानू मक्खन की तरह इन नाजुक पैरों को कभी जमीन पर मत रखना वरना मेले हो जाएंगे!' मन ही मन हम फकत इतना ही कह पाए थे कि श्रीमती जी का एक झन्नाटेदार चांटा फटाक से हमारे गालों पर पड़ा ओर वह हमें खा जाने वाले खूंखार स्वरों में दहाड़ते हुए बोली- -'साले कमीने 14 हजार रुपए मैं ब्यूटी पार्लर में खर्च करके आ रही हूं! 45 हजार रुपए की साड़ी पहन रखी है तथा ब्यूटीशियन ने कितनी मेहनत करके मेरे सौंदर्य को सजाया संवारा तथा निखारा है. किंतु तूने मेरी खूबसूरती की प्रशंसा करने के लिए एक शब्द भी खर्च नहीं किया! और ऊपर की बर्थ पर लेटी हुई औरत के पैरों से शहद की तरह इतनी खूबसूरती टपक रही है कि मन ही मन तू उसकी तारीफ पर तारीफ किए जा रहा है! साले कुत्ते उसके पैर तुझे इतने ही खूबसूरत लग रहे हैं तो जा उसके तलवे चाट ले! उसके पास मुझसे भी अधिक खूबसूरत कुछ हो सकता है तो खड़े होकर उसको भी भरपेट चुम्मा चाटी करले साले खजेले टेगड़े...! चलती हुई रेलगाड़ी में हुई इस अप्रत्याशित घटना के कारण हम ही नहीं बल्कि हमारे सहयात्रियों को भी बड़ा सदमा लगा वे भी आश्चर्यचकित रह गए! किसी की समझ में नहीं आया कि आखिर यह‌ क्या हुआ? शांतचित बैठी हुई एक सभ्य महिला अचानक अपने पति पर शेरनी की तरह टूट पड़ी? किंतु यह स्तंभित कर देने वाला माहौल अधिक समय तक ठहर नहीं पाया. श्रीमती जी के कानों में लगी हुई मशीन को देखकर सामने बैठी हुई महिलाएं अचानक मुक्त कंठ से खिलखिला कर हंसने लगी! पुरुषों के सूखे होठों पर अचानक मुस्कुराहट तैर गई! सभी लोग हमारी तरफ इस तरह देखने लगे जैसे अभी अभी हमने दफा 302 से भी बड़ा अपराध कर दिया हो. कुछ चतुर चालाक और धूर्त प्रकार के पुरुष तो अपनी पत्नियों के कानों की ओर खोजी दृष्टि से देखने लगे कि कहीं इनके कानों में भी पति के मन की बातें सुनाई देने वाली मशीन तो लगी हुई नहीं है? वरना उनकी भी यही दुर्गति हो सकती है...! --विचारक्रांति

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