हो सके तो भुला दो
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हो सके तो भुला दो
कविता
करे तार-तार हवा बने बनाए ढाँचे खाती फिरे पतंग ठोकरें बिना माँझे मिलें ना पैबंद, गरूर दर्जी में दोगुने कैसे बताएँ, दिल की बातें कौन सुने?
लेखक : Rahul
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