हो सके तो भुला दो
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हो सके तो भुला दो
कविता
भुला देना मुझे, जैसे गुजरा हुआ पल, जैसे शाख से टूटा, कोई बेजान फल। तेरे रास्ते रोशन रहें, यही दुआ करूंगा, मैं खुद को अंधेरों में, अकेला छोड़ दूंगा।
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