हो सके तो भुला देना मुझको
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हो सके तो भुला देना मुझको
कविता
हो सके तो भुला दो, मेरी गलतियों की सजा दो। तुझसे दूर जा रहा हूं, खुद को मिटा रहा हूं। जो मैने ना किया है, उसकी भी सजा पा रहा हूं। मेरा गुनाह है इतना, कि मैं गरीब हूं। ना कोठी ना बंगला, मैं इक गरीब हूं।
: निर्मेश
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