तिरस्कृत

client-img

तिरस्कृत


जल्दी जल्दी हाथ चलाते हुए सुमित्रा सबको गरमा- गरम पराठा बनाकर सब को दे रही थी। सुबह का नाश्ता सब साथ ही करते थे। फटाफट परांठे सेंक कर सुमित्रा दोनों बेटे, बहू और पति को दे रही थी। सुबह की भाग दौड़ कुछ ज्यादा ही हो जाती थी। सबको काम पे जाना होता था। दोनों बेटे कमल, नयन और पति को भेज कर थोड़ी सांस ली। अभी वो आ कर बैठी ही थी तभी बहू ने आकर सुमित्रा से नरम स्वर में पूछा, "मां जी....! नाश्ता लाऊं?" सुमित्रा के "हां” कहने पर बहू ने आलू के परांठे और धनिए टमाटर की चटनी लाकर समने रख दिया। बहू को पता था कि मां जी नाश्ते के बाद चाय पीती हैं। इस लिए अदरक वाली चाय नाश्ता खतम होते ही ला कर थमा दिया।

28

Views

5

Ratings

31 Min

Duration


  • लाइब्रेरी

  • श्रेणी

  • लिखे

  • अपडेट

  • शॉप