जीत पक्की है (स्वैच्छिक ओपन)
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जीत पक्की है (स्वैच्छिक ओपन)
कविता
कविता
जब तक ना हाँसिल हो मंज़िल तो राह में, आराम कैसा ? अर्जुन सा, निशाना रख, मन में,*ना कोई बहाना रख ।
: rani
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