एक गांव के बाहरी छोर पर एक हवेली थी । उस गांव के लोगों का मानना था कि वहां भूत है । इस बात को सुनकर वहां जाने की किसी को हिम्मत नहीं होती । उसी गांव में रहने वाला रोहन नाम का लड़का था । वो जब भी गांव वालों के मुंह से ये सुनता था ।
तो वो डरने से बजाए । उसके अंदर की जिज्ञासा जाग जाती थी । उसने अपने मन मैं ठान लिया कि वो भूतों से मिलेगा। वो जानेगा की आखिर असलियत में भूत कैसे दिखते है ।
एक रात यही पता करने वो निकल गया उस हवेली के लिए । वो और उसका दोस्त पिंटू ही थे । अंदर का माहौल डरावना था । पुरानी खिड़कियां खड़खड़ा रही थी। हवा जोर शोर से चल रही थी । वही उल्लुओं की आवाजें काफी तेज थी ।
पिंटू की तो हालत ही खराब हो गई थी । पर रोहन तो नॉर्मली खड़ा होकर वहां की हर चीज को देख रहा था।
तभी एक भूत एक वाइट सी चादर ओढ़े उनके सामने आ गया । वह "बूऊऊऊ" करते हुए चीखा । पिंटू तो वहां से चीखते हुए नो दो ग्यारह हो गया ।
लेकिन रोहन वही खड़ा था । " अरे भूत भाई क्यों चीख रहे हो देखो मेरा दोस्त पिंटू वो तो आप से डर गया । " रोहन ने सहजता से पूछा ।
भूत को लगा कि उसकी दहाड़ बेकार गई । वो अपना चादर उतारा और बोला " तुम मुझसे डर क्यों नहीं रहे हो "
रोहन बोला – "डरना क्यों है तुम यहां पर अकेले हो । शायद तुम्हे भी मेरी तरह कोई दोस्त चाहिए । है न ,,"
भूत उसकी बात सुन हक्का बक्का रह गया । फिर धीरे से बोला " हां,मैं यहां पिछले सौ साल से हु । अकेला ही । लोग मुझे देखते ही डर के भाग जाते है । "
रोहन हस्ते हुए बोला – तो फिर ठीक है । आज से हम दोनों दोस्त ठीक । अब चलो मुझे पहले थोड़ी चाय पिलाओ । फिर देखना मै तुम्हारी दोस्ती पूरी गांव से करवा दुगा ।