अंकों का झोल
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अंकों का झोल
कविता
गिनतियों की दुनिया में खो गए ख्वाब, हर नंबर से दिल पर लगते हैं घाव। सपनों की कीमत इनसे क्यों तोली जाए, अंकों से परे भी जिंदगी मुस्कुराए।
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