कंजूस सास चटोरी बहू

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कंजूस सास चटोरी बहू


पहले एक निकाला फिर सोचा एक और ले लेती हूं बाद में खाने के काम आएगा। उसके हाथ छोटे-छोटे थे दोनों गुड़ समा नहीं रहे थे। ऊपर से घबराहट भी थी कि कहीं अम्मा जाग ना जाए। जैसे ही सुशीला का हाथ जग्गो के चेहरे के ऊपर आया जग्गो को छींक आ गई । उसके छींकते हीं गुड़ सुशीला डर गई और उस के हाथ से गुड की बड़ी सी डली छूट गई और सीधा जग्गो के नाक पे जा गिरा। अचानक से बड़ा-सा गुड़ नाक पर गिरते ही जग्गो दर्द से चिल्ला से उठी और उठकर बैठ गई।

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