मदारी और बंदर
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मदारी और बंदर
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
तमाशे जेसी हो गयी हैं जिंदगी, कोई मदारी बन की नचा रहा है तो कोई बंदर बन के नाच रहा हैं,!!!
लेखक : Miss writer
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