बंदर और मदारी

client-img

बंदर और मदारी


ये कविता एक ऐसे दृश्य को दिखाती है जो दुसरो के लिए सिर्फ एक खेल मात्र है लेकिन अगर इसे ध्यान से समझा और परखा जाए तो ये जंजीर बिना एक गुलामी है । एक बंदर जिसका मुक्कदर उस का मदारी है ।

33

Views

5

Ratings

1 Min

Duration


  • लाइब्रेरी

  • श्रेणी

  • लिखे

  • अपडेट

  • शॉप