डॉक्टर बाना कातिल
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डॉक्टर बाना कातिल
हास्य व्यंग संग्रह
रोजाना प्रकाशित
धर्मवीर हृष्ट-पुष्ट, सुन्दर नवयुवक था। थाली खींचता हुआ बोला-अभी तो दस भी नहीं बजे अम्मॉँ। यहां के मुर्दादिल आदमी सरे-शाम ही सो जाएं तो कोई क्या करे। योरोप में लोग बारह-एक बजे तक सैर-सपाटे करते रहते हैं।
: rani
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