राह का पत्थर
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राह का पत्थर
कविता
जानती नहीं है वो ये कि, मेरी हस्ती है ये क्या, विपरीत हवाओं का रुख मोड़ने का, उफनती दरिया पार करने का, है हौसला मुझमें जान ले ये दुनिया। आज पत्थर हूं राह का, कल नाम मेरा जानेगी दुनिया।
: निर्मेश
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