भरोसा
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भरोसा
कविता
वही होता है पार भवसागर से, जिसका होता है भरोसा तुम पर। जो ना विचलित हो, कठिन राहों पर तेरे चल कर। होती है विजय उसकी, जिसका तुम पर है भरोसा।
: निर्मेश
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