डर के आगे जीत
भोलू खरखोश बचपन से ही बहुत डरपोक था।उसकी दादी ने उसको शेर व जंगल के भूत की ना जाने कितनी कहानी सुनाई हुई थी। इसी डर की वजह से वह खरगोश दिन में ही काम करता था लेकिन रात को कहीं जाने से बहुत डरता था। एक दिन वह किसी काम से अपने घर से बहुत दूर चला गया। उस काम को करने में उसको देर हो गई ।वह अंधेरा होने से पहले अपने घर पहुँचना चाहता था इसलिए वह तेज गति से दौड़ पड़ा।उस गति के कारण वह एक गड्ढे में जा गिरा।उस गड्डे में गिरने की वजह से उसकी टांग पर चोट लग गई। उसने निकलने की बहुत कोशिश की लेकिन वह निकल ना पाया।अब रात हो चुकी थी।जंगल में भेड़ियों की आवाज़ उसको भूतों की आवाज लगने लगी ।उस आवाज़ को सुनकर वह डर के मारे कंपने लग गया।रात के समय नीचे पड़े पेड़ो के सूखे पत्तों पर जब हवा चलती तो उसे ऐसा लगता जैसे कोई आ गया हो । भोलू खरखोश की हालत खराब थी ।आधी रात तक वह वहीं पर दुबक कर बैठा रहा ।भेड़ियों की आवाज व उल्लुओ की आवाज रात को ओर भयानक बना रही थी भोलू के डर के मारे जान निकलने वाली थी कि तभी एक चूहा उसके पास आया ।उसको इस तरह से डरता देख वह बोला....इतने बड़े होकर तुम डर रहे हो, मेरे को देखो में शरीर में तुमसे छोटा हुँ फिर भी बेखौफ घूम रहा हुँ ।उसके ऐसा बोलने के बाद भोलू खरखोश बोला... भोलू खरखोश: -मेरी दादी ने बताया था कि जंगल में भूत होता है ।यह तुम जो आवाज़ सुन रहे हो यह उसी भूत की आवाज है । भेड़ियों की आवाज़ सुनकर चूहा बोला....अरे यह तो एक जानवर है जो रात को बोलता है ।भाई डर के आगे जीत होती है इसलिए तुम डरो मत ओर भाग कर चले जाओ अपने घर ।अगर तुम ऐसे ही पड़े रहे तो कोई जानवर तुमको खा लेगा । उसकी यह बात सुनकर भोलू के दिमाग़ से डर निकल गया ।उस चूहें ने कुछ घास उस गड्ढे में गिरा दी ।अब भोलू बाहर निकलकर घर भाग गया ।तब उसको पता चला कि डर के आगे जीत होती है