समय का दौर

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समय का दौर


बहुत समय पहले की बात है एक राजा थे जिनका नाम था बुद्धदेव ।एक रात उनकी रानी को सपना आया कि उनका बाग हरा भरा हो गया ।रानी ने यह बात अपने पास सो रहे राजा को बताई । राजा ने उसको कहा कि सपना कभी सच नही होता लेकिन रानी ने उनको बताया कि मेरा हर सपना सच होता है ।राजा भी बहुत जिद्दी था वह रानी को बोला.....अगर तुम्हारा सपना सच हो गया तो मैं अपने आप को फांसी लगा लूंगा।अगर तुम्हारा सपना सच नही निकला तो मैं तुमको राज्य से निकाल दूँगा । रानी ने यह शर्त मंजूर कर ली ।अगली सुबह जब मंत्री आया तो राजा ने उसको रात वाली सारी घटना बताई।मंत्री उस बाग को दिखने के लिए गया ।मंत्री ने जाकर देखा तो बाग हरा भरा था उसको हरा भरा देखकर मंत्री भी हैरान था । उसने सोचा अगर राजा को मैने सच बताया तो वह फांसी ले लेंगे ।उनके ऐसा करने पर राज्य की देखभाल कौन करेगा ।इसलिए उसने राजा के पास जाकर झूठ बोल दिया ।राजा ने जब सुना कि बाग वीरान है तो उसने रानी को राज्य से निकाल दिया। रानी राज्य के बाहर एक जंगल में बैठी रो रही थी ।उसको रोता देख एक साधु ने उसको अपनी बेटी बनाकर आश्रम में रख लिया ।रानी के पेट में राजा की औलाद दी। कुछ महीने के बाद उसने एक बच्चे को जन्म दिया जिसका नाम तेरह रत्न बलवान रखा गया । बच्चा जब जवान हुआ तो आश्रम के सारे काम खुद करने लगा ।एक दिन वह नदी के पास पानी लेने गया था ।वहाँ पर एक व्यापारी का जहाज खड़ा हुआ था ।वह जहाज चलने से पहले एक बलि माँगा करता था ।व्यापारी के नौकर ने तेरह रत्न बलवान को पकड़ लिया।वह उसको उस जहाज पर ले गये । जब वहाँ जाकर तेरह रत्न बलवान को सच पता चला तो उसने उनको बोला.....आप मेरी बलि मत दो बस मेरे हाथ की छोटी ऊँगली को थोड़ा सा काट दो ।उसके ऐसा बोलने पर नौकर ने ऐसा ही किया ।तेरह रत्न बलवान ने जहाज पर अपने खुन का टुपका गिरा दिया जिससे वह जहाज चल पड़ा । व्यापारी यह देखकर हैरान था ।उसने उसको उस जहाज पर ही कैद कर लिया ।समय बीतता गया ।एक दिन एक राजकुमारी की नजर तेरह रत्न बलवान पर पड़ी ।उसके रूप रंग को देखकर उसने उससे शादी कर ली ।उसकी शादी हो जाने के बाद व्यापारी का राजकुमारी पर दिल आ गया ।मौका पाकर उसने तेरह रत्न बलवान को समुन्द्र में धक्का दे दिया ।उसके बाद उसने राजकुमारी को कहा कि तुम्हारा पति मर गया राजकुमारी को उसकी बातों पर यकीन नही हुआ ।व्यापारी ने उसको शादी करने के लिए कहा वह बोला....मैं तुमको अपनी रानी बनाकर रखुगा लेकिन वह नही मानी ।उसने व्यापारी को कहा कि जब तक मेरे तन के कपड़े फट नही जाते तब तक मैं तुमसे शादी नही करूंगी। व्यापारी मान गया ।समय के साथ रानी के कपड़े भी फट गये ।व्यापारी ने फिर से उसको बोला।लेकिन वह बोली ....जब तक कोई मुझे तेरह रत्न बलवान की कहानी नही सुनाएगा तब तक शादी नही होगी ।व्यापारी ने यह घोषणा करवाई कि जो कोई तेरह रत्न बलवान की कहानी सुनाएगा उसको मुँह मांगा इनाम दिया जायेगा । यह सुनकर तेरह रत्न बलवान जो बच गया था ।वह उस व्यापारी के महल मे आया ओर उसने भेष बदलकर वह कहानी सुनाई ।वहाँ पर उसका पिता बुद्धदेव भी बैठा था ।वह कहानी सुनकर वह बोला ...तुम कौन हो ? तब उसने राजा को कहा. ..महाराज मैं ही तेरह रत्न बलवान हुँ इस व्यापारी ने मुझे समुन्द्र में फेंक दिया था ।यह सुनकर राजा बुद्धदेव ने उसको गले से लगा लिया साथ में उस व्यापारी को फांसी दे दी ।अब राजकुमारी व तेरह रत्न बलवान साथ साथ रहने लगे आप मेरी कुछ रचनाएँ प्रतिलिपि पर भी पढ़ सकते हैं ।इस ऐप पर यह मेरी पहली कहानी है

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