गुस्से की आग
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गुस्से की आग
कविता
गुस्से की आग मन को जलाती, रिश्तों की डोरी धीरे-धीरे तोड़ती। धैर्य, प्रेम और क्षमा से इसे हराएं, शांति की राह पर जीवन सजाएं।
: Anu
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