बाल मजदूरी एक मजबूरी

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बाल मजदूरी एक मजबूरी


बाल मजदूरी एक अभिशाप है हमारे समाज के लिए। पर गरीब परिवार के बच्चे अपना गुजारा करने के लिए,पेट पालने के लिए बाल मजदूरी करने को विवश होते हैं। उनकी मजबूरी होती है बाल मजदूरी करना और उनके परिवार की मजबूरी होती है उनसे मजदूरी करवाना। और समाज का एक रईस तबका होता है जो इनका शोषण करने को इनकी मजबूरी का फायदा उठाने को मौके की ताक में लगे रहते हैं। हमारे परिचय में एक इंजीनियर साहब का परिवार था। वो हमारे ही घर के पास रहते थे। उनके दो बेटियां और दो बेटे थे। चारों बड़े बड़े थे। इंजीनियर साहब के एक परिचित केसरवानी जी थे। उनके घर में एक सात साल का लड़का घरेलू काम करता था।

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