गुस्से की आग
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गुस्से की आग
कविता
गुस्से की आग में जलकर खाक हुए वो अपने वो सपने सब तबाह हुए न पूछ मुझसे क्या पाया है मैंने पूछ मुझसे क्या क्या गवाया हैं मैंने
: A Rai anu
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