अब वो एक भयानक शापित आत्मा के रूप में सभी को दिख रहा था। उसकी हरी हरी आंखे किसी ड्रेगन ही आंखो की भांति जल रही थी। पहले उसने श्यामू को उसको गमछे से गला घोट कर मारा फिर जिन दोनो ने उसके पैर पकड़े थे उनको पैर से उठा कर इतनी जोर से जमीन पर पटक की उनके शरीर से मांस जगह जगह फैल गया।
अब बारी चाचा की थी । चाचा बार बार गिड़गिड़ा रहा था "बेटा नरेश..! मुझसे गलती हो गई मुझे छोड़ दो । मुझे माफ कर दो।”