वतन की मिट्टी
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वतन की मिट्टी
कविता
खुशबू है वतन की, जो हर दिल को लुभाए, इसकी गोद में ही हर सपना पल जाए। तपती धूप हो या सर्द हवाओं का आलम, ये मिट्टी सदा हमें अपना कह जाए।
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