अपंगता से लड़ने की कहानी

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अपंगता से लड़ने की कहानी


मेरी तेज चीख सुन कर भाई भाग कर आया उसने जल्दी से ट्यूब वेल बंद की। पर तब तक वो मेरे दाहिने हाथ की बलि ले चुका था। तुरंत मुझे लाद फांद कर हॉस्पिटल पहुंचाया गया। आज मैं डिस्चार्ज हो रहा था। पर अपना एक हाथ गंवा कर। ये सिर्फ मेरा एक हाथ नहीं गया था। मेरे पूरे परिवार की रीढ़ की हड्डी टूट गई थी। मेरे सारे सपने चूर हो गए थे। घर आया।

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