पर ट्रेन नहीं आई।
वो आज वापस नहीं लौटने का निर्णय कर के निकली थीं शायद।
अब वो रेलवे पुल की ओर चल पड़ीं।
बड़ी मेहनत से किसी तरह एक एक स्टेप चढ़ी।
फिर ऊपर पहुंच गईं।
अब वो रेलिंग के बीच से निकल कर नीचे कूदने को अग्रसर हो उठी।
अब मुझे नहीं रुकना था।
मैने दौड़ कर चीना दीदी को पूरी ताकत से पकड़ लिया। और बोल उठा,
“दीदी..! दीदी..! आप ये क्या कर रही हैं.? पाप है ये।”
मुझे चिल्लाते देख कर और भी लोग इकट्ठे हो गए।
सब ने चीना दीदी को पकड़ लिया।
वो दोनों हाथों में अपना चेहरा छुपा कर फफक फफक कर रो पड़ी।
“क्यों बचा लिया मुझे तुमने..? मुझे मर जाने दो। मैं बोझ हूं अपने घर वालों पर।”