मुझे आजाद होना है " ये कहना कितना आसान है न लेकिन दूसरे के दिल पर क्या बितती है इसका शायद कहने वाले को कोई अंदाजा नहीं ! ये कहानी रुचिका मेहरा की जिसने एक दिन अपनी जिंदगी से हारकर अपने सारे रिश्तों से कह दिया मुझे आज़ाद होना है लेकिन किस्मत भी कहाँ किसी को इतनी जल्दी आजाद करने वाली थी ! नियति ने भी खेला अपना ही खेल ; ला दिया जिंदगी के एक नए मोड़ पर ! जो कहानी ख़तम हुई मुंबई की गलियों में वो शुरू हुई कश्मीर की वादियों में ! हो गई रुचिका मेहरा रातों रात गायब ? क्यों किया रुचिका को किसी ने पहाड़ो की वादियों से गायब ? क्या करने गयी थी रुचिका कश्मीर में ? क्यों हार चुकी थी वो अपनी जिंदगी ? गायब होना क्या किसी का बदला था मुंबई की गलियों का जिससे वो भाग कर आई थी ? जानने के लिए पढ़ते रहिये " Aajad hona hai tumse