मिलन की आस
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मिलन की आस
कविता
तेरी राहों में निगाहें बिछाए बैठे हैं, पिया मिलन की आस में दिल लगाए बैठे हैं। विरह की इस रात का बस अब यही सपना है, तेरी बाहों में सुकून का जहां बसाए बैठे हैं।
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