बाल विवाह की छाया

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बाल विवाह की छाया


इस कहानी में राधा, एक 12 वर्षीय लड़की, अपनी मासूम इच्छाओं और बड़े सपनों के साथ जी रही थी, लेकिन समाज की परंपराओं के कारण उसके माता-पिता ने उसकी शादी तय कर दी। शादी के बाद राधा को घरेलू जिम्मेदारियों में झोंक दिया गया, जिससे उसके सपने अधूरे रह गए। एक दिन गाँव में शिक्षिका मालती ने बच्चों और महिलाओं को शिक्षा के महत्व के बारे में बताया, जिससे राधा की सास को राधा को पढ़ाई का मौका देने की प्रेरणा मिली। राधा ने मालती के शिक्षा केंद्र में पढ़ाई शुरू की, और उसके आत्मविश्वास ने उसे नई ऊंचाइयों तक पहुँचाया। जब उसे छात्रवृत्ति मिली, तो वह शहर जाकर पढ़ाई कर सकी। वहाँ अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद, वह गांव वापस लौटी और एक स्कूल खोला ताकि बच्चों और महिलाओं को पढ़ाई का अवसर मिल सके। राधा और उसके पति राजू के प्रयासों ने गांव में शिक्षा और जागरूकता फैलाई, जिससे लोगों का नजरिया बदल गया और बाल विवाह जैसी परंपराओं पर रोक लगने लगी। I hope you like this story 💓💓
: Anu

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