स्वाभिमान

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स्वाभिमान


बहुत दिनों के बाद , आज कलम उठाई है? जाने मन में क्यों , घोर उदासी छाई है? पल पल भर की ये छाणिक खुशी जो आई हैं!... जाने क्या संग लाई है , है हृदय विलय सौदे जो ,वो मुख पृष्ठ से छीन जा रहा तेज स्वर्ण जो था अनंत काल का ,आज रुंद्र होता जा रहा । ये स्वाभिमान का गहना,,जिसने भी है पहना,,,! न जाने क्यों,,वो हो चुका,,, आबाद!
: Cold heart

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