बहुत दिनों के बाद ,
आज कलम उठाई है?
जाने मन में क्यों , घोर उदासी छाई है?
पल पल भर की ये छाणिक खुशी जो आई हैं!...
जाने क्या संग लाई है ,
है हृदय विलय सौदे जो ,वो मुख पृष्ठ से छीन जा रहा
तेज स्वर्ण जो था अनंत काल का ,आज रुंद्र होता जा रहा ।
ये स्वाभिमान का गहना,,जिसने भी है पहना,,,!
न जाने क्यों,,वो हो चुका,,, आबाद!