स्कूल बचपन से ही शुरू होता है क्योंकि सही सिख हमें बचपन में ही मिलती है।
बचपन एक कच्चे माटी के घड़े की तरह होता हैं। जिसे जैसा ढालों बन जाता है। बचपन की बाते बचपन की यादें हमारे साथ सारी उम्र रहती है। और बचपन का स्कूल भी जो अपनी अच्छी बुरी यादों के साथ हमसे हमेशा जुड़ा रहता हैं।