याद है हमें वह पल जो पहली बार गए
जब अपने बचपन के स्कूल में
जिद्दी होते थे बहुत स्कूल दिख जाने
से पहले रोते थे बहुत ; पूरा स्कूल उठा लेते थे
अपने शोर से ...
अध्यापक का हमें चुप कराना,अपने साथ बिठाना फिर माँ की तरह फिर उनका आपनी गोद में बिठाना...
जो बात हमें पसंद थी वही बात
करके हमारा दिल बहलाना ....
फिर उनका चॉक्लेट देना उसे देख मिठी सी मुस्कान आना झिझकते उसे पकड़ लेना ...
अध्यापक का हमें फिर अच्छी लगना
धीरे धीरे से वह अपनी सी लगना...
धीरे से अपनी कॉपी लेकर जाना
पहुँचे नहीं तुम मेरे पास फिर जोर से
उनकी मुझे आवाज़ लगाना...
# प्रतियोगिता
©®Malwinder kaur(Malwin)