गाँव के छोर पर बसा हुआ एक साधारण सा घर था, जिसमें माधव नाम का एक किसान अपनी पत्नी रमा और अपने दो बच्चों के साथ रहता था। माधव अपने खेतों में कड़ी मेहनत करता था। उसकी ज़िंदगी सादगी और संघर्ष का प्रतीक थी। वह सुबह जल्दी उठता, खेतों में हल चलाता, और शाम को थका-मांदा घर लौटता। गाँव के लोग उसे एक ईमानदार और मेहनती व्यक्ति के रूप में जानते थे।
लेकिन माधव की ज़िंदगी में एक ऐसी घटना घटी जिसने उसकी और उसके परिवार की पूरी दुनिया बदल दी।