भाई

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भाई


आरव और सिया, दो प्यारे भाई-बहन, जो हर वक्त एक-दूसरे से झगड़ते रहते थे। कभी खिलौनों को लेकर, तो कभी टीवी का रिमोट किसके पास होगा, इसे लेकर दोनों में हमेशा बहस होती थी। उनके माता-पिता ने कितनी बार उन्हें समझाया कि भाई-बहन का रिश्ता बहुत खास होता है, लेकिन उनके लिए यह बस एक मस्ती का बहाना था। भाई दूज का त्यौहार नज़दीक आ रहा था। इस दिन सिया को आरव को तिलक लगाना होता था, लेकिन आज उसने कहा, "मम्मी, आरव हर वक्त मुझसे लड़ता रहता है। मैं अब भाईदूज पर उसे तिलक नहीं लगाऊंगी।" यह सुनकर माँ थोड़ी सोच में पड़ गईं और फिर एक योजना बनाई। उन्होंने दोनों को अपने पास बुलाया और कहा, "मैं तुम्हें एक कहानी सुनाती हूँ। शायद इससे तुम दोनों को भाई दूज का असली मतलब समझ में आए।" --- उसकी मां ने दोनों बच्चों को कहा ध्यान से सुनना कहानी को- एक समय की बात है, एक गाँव में वीर और मीरा नाम के भाई-बहन रहते थे। उनके माता पिता पिछले साल एक दुर्घटना में चल बसे। चुकि वीर बड़ा था इसलिए मता पिता की मृत्यु के बाद हमेशा मीरा का ख्याल रखता था। लेकिन एक दिन गाँव में बाढ़ आ गई। गाँव के सभी लोग जल्दी जल्दी में गांव से निकल गए परंतु कई लोग फंस गए, और हालात बहुत मुश्किल हो गए थे। वीर ने देखा कि उनकी झोपड़ी पानी से घिर गई है। उसने तुरंत मीरा का हाथ पकड़ा और उसे एक ऊँची जगह पर ले गया, ताकि वह सुरक्षित रहे। रात भर वीर ने मीरा की देखभाल की, उसे ठंड से बचाने के लिए अपनी चादर दे दी, और खुद रात भर पानी में रहा। सुबह होते ही किसी तरह उसे अपने कंधे पर बैठाकर सुरक्षित स्थान पर ले आया। जब गाँव के लोगों ने अगले दिन सुबह सुबह वीर की बहादुरी को देखा तो उसकी काफी सराहना की। गांव के लोगों का कहना था कि वीर ने अपनी जान दांव पर लगा कर अपनी बहन मीरा को बचा लिया। उस दिन से मीरा को समझ में आया कि उसका भाई ही उसका सबसे बड़ा सहारा है, चाहे हालात जैसे भी हों। --- कहानी खत्म करने के बाद माँ ने कहा, "भाई दूज का मतलब सिर्फ तिलक लगाना और मिठाई खाना नहीं है। यह त्यौहार इस बात की याद दिलाता है कि भाई-बहन हमेशा एक-दूसरे के साथ खड़े रहते हैं, चाहे जैसे भी हालात हों। जैसे वीर ने मीरा की रक्षा की, वैसे ही हर भाई-बहन को एक-दूसरे का सहारा बनना चाहिए।" आरव और सिया ने माँ की बात ध्यान से सुनी। सिया ने समझा कि भाई दूज केवल एक रस्म नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी का अहसास है। उसने मुस्कुराते हुए कहा, "ठीक है, मम्मी। इस बार मैं आरव को तिलक लगाऊंगी और हम दोनों अच्छे भाई-बहन बनने का वादा करेंगे।" आरव ने भी सिया की तरफ देखा और बोला, "मैं भी वादा करता हूँ कि मैं सिया का हमेशा ख्याल रखूंगा।" उस दिन के बाद, आरव और सिया के बीच झगड़े तो होते रहे, लेकिन अब उनके रिश्ते में एक नया एहसास था। भाई दूज का असली मतलब अब उन्हें समझ में आ गया था।

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