दुआ में भाई
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दुआ में भाई
कविता
पड़े नहीं एक फुल भी मेरे द्वार पर, रहे आन्नद में मेरा भाई, यही मेरी दुआ है। बिखरे मेरे स्वप्न प्रत्येक प्रभात में, बिखरे नहीं स्वप्न यूँ उस का, यही मेरी दुआ है।। हर ॠत से परिचित हो चुकी मैं, ढोना न पड़े यूँ उस को कठोर सच का शव, यही मेरी दुआ है।।।
: Shree Kriti
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