दिवाली क़ा त्योहार
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दिवाली क़ा त्योहार
कविता
हर दीप जलता है यहां उम्मीद की लौ बनकर, हर दिल मुस्कुराता है अपनेपन की राह बनकर। दिवाली की रोशनी में छुपी है वो खास बात, कि हर घर में खुशियों का हो बसेरा दिन-ओ-रात।
: Anu
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