बेदर्द जमाना
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बेदर्द जमाना
कविता
इस बेदर्द जमाने से शिकायत क्या करना यहां तो भावनाएं होते जैसे कोई खिलौना .. यहां हर इंसान में बस चुका है अब लालच का शैतान यहां सच को भी देना पड़ता है अपने सही होने का प्रमाण ..
: Jasmita Bhuyan
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