बचपन से सुंदर और खुशनुमा कुछ नहीं, जहां हर चिंता हर फिक्र से दूर होकर छोटी बड़ी खुशियों से ही दिल खुश हो जाता था, पल भर में खुशी टोह पल में गुस्सा आता था, गुम ना हमको छू पाता था, घर का हर बड़ा खुद गमों के समन्दर में डूब कर भी हमारी खुशियों के पलो की नैया पार लगाता था।