बादलों की सवारी
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बादलों की सवारी
कविता
बादलों के संग उड़ा जब मन, हर रास्ता लगा हो अनजाना गगन। धुंधली राहों में भी चमकती थी उम्मीद, हर मोड़ पर मिला कोई नया जीवन।
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